शिक्षक

जिनकी गोद में क्रीड़ा करते प्रलय और निर्माण,

जिनके प्रयासों  से बनता मेरा भारत महान।

उस शिक्षक की गरिमा को मेरा कोटि कोटि प्रणाम।

जो चाहे तो चंद्रगुप्त को बनाएं सम्राट महान,

अर्थशाश्त्र लिखने वाले चाहे कौटिल्य या गीता पढ़नेवाले  भगवान्।

जिनकी वंदन करने पर मिले कल्याण,

उन शिक्षक की निष्ठा को मेरा कोटि कोटि प्रणाम।

गर शिक्षक का हो अभाव, कैसे संभव हो राष्ट्र निर्माण ।

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