दिल में छुपी हुई दस्तूर हो तुम

दिल में छुपी हुई दस्तूर हो तुम,

जानता हूँ दिल के हाथों मजबूर हो तुम।

शक्ल तो कभी देखा नही,

दिल मेरा कहता है कि जन्नत से उतरी हूर हो तुम।

मोहब्बत तुमसे की है, तेरे नाम से नही,

शराब बोतल से पी है मैंने जाम से नही।

लोग कहते हैं बहुत दर्द देता है जुदाई,

जानता हूँ सह ना सकोगे पल भर भी मेरी रुसवाई।

मुद्दतों बाद आज फिर हमने कलम उठाई,

जान लेकर ही रहेगी मेरी ये तन्हाई।

 

कवि गौरव कुमार सिंह

 

3 thoughts on “दिल में छुपी हुई दस्तूर हो तुम

  1. site November 5, 2019 at 12:49 am

    I don’t even know how I ended up here, but I thought this post was great.
    I do not know who you are but definitely you are going to a famous blogger if you are not already 😉 Cheers!

    • langheadworldaloksir May 11, 2020 at 9:19 am

      Thanks

  2. langheadworldaloksir May 11, 2020 at 9:06 am

    What do you mean?

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