दिल में छुपी हुई दस्तूर हो तुम

दिल में छुपी हुई दस्तूर हो तुम,

जानता हूँ दिल के हाथों मजबूर हो तुम।

शक्ल तो कभी देखा नही,

दिल मेरा कहता है कि जन्नत से उतरी हूर हो तुम।

मोहब्बत तुमसे की है, तेरे नाम से नही,

शराब बोतल से पी है मैंने जाम से नही।

लोग कहते हैं बहुत दर्द देता है जुदाई,

जानता हूँ सह ना सकोगे पल भर भी मेरी रुसवाई।

मुद्दतों बाद आज फिर हमने कलम उठाई,

जान लेकर ही रहेगी मेरी ये तन्हाई।

 

कवि गौरव कुमार सिंह

 

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